इंतज़ार  

Posted by आशीष in

मै तब भी इंतज़ार करता था
मै अब भी इंतज़ार करता हूं

कभी आसमान को देखता हूं
कभी पास खडी इमारतो को
कभी फ़ोन कान के पास रख
अभिनय किया करता हूं

फिर बार-बार सबसे नज़रे बचाकर
तुम्हारे घर को देखता हूं
कि अब
शायद अब तुम बाहर आओ

मै रोज़ आता हूं
सिर्फ़ तुम्हे देखने

मै तब भी इंतज़ार करता था
मै अब भी इंतज़ार करता हूं