मन मे एक उन्माद है
कर दिखा , कुछ कर दिखा
बज रहे सौ नाद है
कुछ कर दिखा , कुछ कर दिखा ||
स्वप्न ले आंखो मे चल
मन भले ही हो विह्वल
दूरियों को दूर से ही देखकर
तू प्रण ये कर
की, भाग्य भी आये
अगर
और जग से हो तेरा समर
तब वक़्त की जंजीर को तोड़े हुए
आगे तू बढ़ |
और मृत्यु से आँखे मिलकर
दे उसे सच aये बता
कल है मेरा ,कल है मेरा
कुछ कर दिखा , कुछ कर दिखा ||
चाहे ये जग तुझपर हंसा
चाहे खुदा भी फ़िर गया
चाहे तेरी राहो के संबल
बन गए पत्थर , मगर
न हार को स्वीकार कर
मत भाग्य का सतकार कर
निश्चय बना अतल तेरा
और जीत को पुकार दे
ये तन ये मन सारा जीवन
हर एक साँस वार दे
जीत जा , जगती को उसके
सत्य का दर्पण बता
कुछ कर दिखा, कुछ कर दिखा ||
वह कठोर तप तू कर
कि ईश को भी डर लगे
देना पड़े उसको वहि
जो मांग तेरा मन करे
तेरे परिष्रम से स्वयं
ष्रम को पसीना आएगा
तब देखना उस दिन तू सारा
जग विजय हो जायेगा
की पर्वतो को चीरकर
आगे तू बढ़, कुछ कर गुज़र
कुछ कर दिखा , कुछ कर दिखा ||
राहो में चाहे अनगिनत कांटे मिले
पैरो तले
मन में चाहे चुभते हजारो
रक्त की बूँदें गिरे
तब एक दुनिया डूब जाने दे
मगर तू हार ना
कर दे विवश जगती भले
मत हार को स्वीकारना
प्राणो की ज्योति की भले
अंतिम किरण देनी पड़े
देना पड़े तुझको ये जीवन
शर ये मन देना पड़े |
पीछे न हटना एक पग भी
अग्रसर रहना सदा
कुछ कर दिखा, कुछ कर दिखा ||
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on Saturday, July 19, 2008
at 10:46 PM
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kavita
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